1. ममता की मूरत (Mamta Ki Moorat)
“थक कर जब भी दुनिया से, मैं घर की चौखट आता हूँ, माँ तेरे आँचल की छाँव में, मैं सारे दर्द भुलाता हूँ। वो बिना कहे सब सुन लेना, वो माथा चूम सुला देना, तेरी एक छुअन से ही तो माँ, मैं खुद को फिर से पाता हूँ।”
— कविता: ममता की मूरत
2. ईश्वर का पता (Ishwar Ka Pata)
“मंदिर-मस्जिद मैंने ना देखे, ना घूमे मैंने तीरथ-धाम, मैंने तो बस सुबह-सवेरे, जपा है अपनी माँ का नाम। कहते हैं भगवान है हर पल, हर जीवन के आस-पास, मैंने अपनी माँ की आँखों में, देखा है उसका वास।”
— कविता: ईश्वर का पता
3. वो रोटी की मिठास (Roti Ki Mithaas)
“दुनिया के हर पकवान चखे, पर वो स्वाद नहीं मिल पाता है, जो माँ के हाथों की सादी रोटी में, अमृत बन कर आता है। खुद भूखी सो जाती है अक्सर, पर बच्चों को खिलाती है, ये माँ ही है जो आंसुओं को पीकर, होंठों पे हँसी सजाती है।”
— कविता: वो रोटी की मिठास
4. अनकही भाषा (Ankahi Bhasha)
“मैं मुस्कुराता हूँ तो वो, मेरी खुशी में मुस्कुराती है, मेरे छुपाये हुए आंसुओं को, न जाने कैसे पढ़ पाती है। दुनिया परखती है मुझे हमेशा, मेरी कमियों के तराजू पर, एक माँ ही है जो मेरी हर खता को, प्यार से भूल जाती है।”
— कविता: अनकही भाषा
5. अजेय दुआएं (Ajeya Duaein)
“रास्ते के हर काँटों को, वो फूलों में बदल देती है, मेरी हर एक हार को वो, मेरी जीत में बदल देती है। कभी जो गिर जाऊं मैं सफर में, तो हौसला वो बन जाती है, माँ की दुआएं तो मुकद्दर की, लकीरें तक बदल देती हैं।”
— कविता: अजेय दुआएं
6. माँ की परछाई (Maa Ki Parchhai)
“तेरी उंगलियाँ पकड़ कर मैंने, चलना सीखा है संसार में, हर ठोकर से बचाया तूने, छिपा लिया अपने प्यार में। जब भी धूप ने झुलसाया, तू घना साया बन गई, मेरी जिंदगी के हर अँधेरे में, तू उजला सवेरा बन गई।”
— कविता: माँ की परछाई
7. अमूल्य कर्ज (Amulya Karz)
“अपनी रातों की नींदें देकर, मेरे ख्वाबों को सजाया है, खुद पहन कर पुराने कपड़े, मुझे हर बार नया पहनाया है। दुनिया की सारी दौलत भी, कम पड़ जाएगी तराजू में, माँ के प्यार और त्याग का कर्ज, कभी चुकाया न जाए।”
— कविता: अमूल्य कर्ज
8. साक्षात खुदा (Saakshat Khuda)
“चोट मुझे लगती है, पर आंसू उसके बह जाते हैं, मेरे एक दर्द में, उसके सौ सुख दह जाते हैं। दुनिया की नज़रों में वो भले एक आम मूरत है, पर सच तो ये है कि मेरी माँ, साक्षात खुदा की सूरत है।”
— कविता: साक्षात खुदा
9. घर की धड़कन (Ghar Ki Dhadkan)
“दीवारों से घर नहीं बनता, घर बनता है माँ की सांसों से, रौशनी चिरागों से नहीं होती, होती है माँ की आँखों से। सारा घर सूना लगता है, जो एक दिन वो नज़र न आए, वही तो धड़कन है इस आशियाने की, जो पूरे परिवार को बांधे जाए।”
— कविता: घर की धड़कन
10. माँ की दुआ (Maa Ki Dua)
“जब सारे दरवाजे बंद हो जाएं, और दुनिया मुँह फेर ले, जब हार और निराशा का अँधेरा, मुझे हर तरफ से घेर ले। तब भी एक आवाज़ आती है, ‘तू हिम्मत मत हारना’, माँ की दुआओं का असर ही है, जो सिखाता है हर भंवर को पार करना।”
— कविता: माँ की दुआ





